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पापा की सीख़

मेरा नन्हा सा ज़ग पापा, तुम्हरी छाया में पला बढ़ा |
बचपन से चलते चलते, आज मैं तुमसे दूर खड़ा ||

आपने ही तो समझाया, संसार बहुत ही खोटा है |
तूफानों में खड़े रहो तो, नील गगन भी छोटा है ||

ऊँगली पकड़ दिखाया था, क्या दुनिया का मिलना है |
कैसे घुटनों पर चल करके, पैरों पर मुझको टिकना है ||

घबराना ना थक जाना, जब तू बिलकुल एकाकी है |
जब हो ना कोई साथ तेरे, तो तेरा पापा साथी है ||

थकना झुकना पीछे हटना, तेरे लिये नहीं बना है |
हर सीढ़ी चढ़ सूरज छूना, मेरी आँखों का सपना है ||

आप मेरी जमीं, आसमां मेरा, खुदा मेरे भगवान हैं |
पहचान आपसे है पापा, कदमों में सारा जहान है ||

बेटे का फ़र्ज़ निभा पाऊं, ऐसा संकल्प उठता हूँ |
दुनियाँ के हर "बाप" के, चरणों में शीश झुकता हूँ ||

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ये चर्चा आम होने दो

तुम्हें हसने मनाने में, सुबह से शाम होने दो |
मोहब्बत है मुझे तुमसे, ये चर्चा आम होने दो || 
तेरे साथ होने का, मुझे भी फ़क्र होता है |  गुनाह गर है ये तो, यही इलज़ाम होने दो || 
फ़कत बस तेरे छूने से, सिहर जाती है रूह मेरी |  भला गर है नहीं यह, तो बुरा ही काम होने दो || 
तुम्हारी मुस्कराहट भी, गज़ब का कहर ढाती है |  मर जाऊं मैं गर इसपे, मेरा अंज़ाम होने दो || 
पल भर साथ देखा है, तो क्यों जलते हो शहर वालों |  अभी तो खोया हूं मैं बस, ज़रा गुमनाम होने दो || 
बदला बफ़ाओं का, देंगे सादग़ी से हम |  मेरे नाम में शामिल, तुम्हारा नाम होने दो | 
इज़हार-ऐ-तमन्ना का, अब सरेआम होने दो |  मोहब्बत है मुझे तुमसे, ये चर्चा आम होने दो ||

माँ की परिभाषा

माँ धरती, माँ आकाश है,
माँ फैला हुआ प्रकाश है |
माँ श्रद्धा, माँ विश्वास है,
माँ एकमात्र ही आस है ||

माँ आँगन की तुलसी जैसी,
माँ बरगद जैसी छाया है |
माँ सहज बेदना कविता की,
माँ महाकाव्य की काया है ||

माँ ममता की एक मूर्ति है,
माँ संस्कारों की पूर्ति है |
माँ हर हाथों की शक्ति है,
माँ एक प्रेम की भक्ति है ||

माँ हरी दुब है धरती की,
माँ केसर वाली क्यारी है |
माँ की उपमा केवल माँ है,
माँ हर घर की फुलवारी है ||

माँ गंगा, यमुना, सरस्वती,
माँ लक्ष्मी, गौरी देवी है |
माँ ही धरती का स्वर्ग है,
माँ साक्षात ही ईश्वर है ||

माँ झरनों का मीठा स्वर है,
माँ सहस्त्र ढाल प्रखर है |
माँ पूरी की पूरी भाषा है,
बस यही माँ की परिभाषा है ||

वक़्त लगता है

दिल-ऐ-इश्क़ इज़हार में, वक़्त लगता है |
नये परिंदों को उड़ने में, वक़्त लगता है ||

दिल के सारे अरमानों को, ख़त में लिखना चाहा है |
प्यार का पहला ख़त लिखने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

इश्क़-ऐ-इज़हार को, आँखों में छुपाकर रखा है |
आँखों से मोहब्बत पड़ने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

तन की बात नहीं है, उसके मन तक मुझको जाना है |
लम्बी दूरी तय करने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

ख़्वाबों में दीदार के तेरे, महल सज़ा इक रखा है |
पर ख़्वाब मुकक्मल होने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

हया का पर्दा आ जाता है, हाल-ऐ-दिल सुनाने में |
हया की बदली के छटने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....


तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |

तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |
प्यार भरे दिल के पन्नों से कोई पैगाम लिख डालूं ||

प्यार से मुझको देखकर यूँ मुस्कुरा जाना,
निगाहें मिलने पर पलकें झुका जाना,
झुकी हुई नज़रों का सारा अंदाज लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (१)

धड़कते दिल को इक दिन तेरे खत का मिल जाना,
शायरों की महफ़िल में नये शायर का आ जाना,
दिल से आज की ग़ज़ल को तेरे नाम लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (२)

तमन्ना थी हर सुबाह में दीदार के तेरी,
तुझे पाने से पहले थी अधूरी हर तमन्ना मेरी,
हर तमन्ना में जीने की तू ही बजाह लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (३)

उठते है हाथ बहुत दुआओँ के लिए तेरी,
ऐ खुदा छोटी सी दुआ भी है इक मेरी,
दुआ में तुझको अपना सबसे ख़ास लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (४)

तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |
प्यार भरे दिल के पन्नों से कोई पैगाम लिख डालूं ||

माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

चलते चलते मैं घुटनों से, पैरों पर आपने खड़ा हुआ |
आँचल में तेरी ममता के, जानें कब बच्चा बड़ा हुआ ||

कैसे भूलूँ उस भाषा को, जो होठों से सिखलायी थी |
मुझे सुलाने को रात भर, तुमने जो लोरी गाई थी ||

काला टीका और दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसा है |
मैं ही मैं हूँ हर जगह तुम्हे, जानें ये प्यार तुम्हारा कैसा है ||

सीधा साधा भोला भाला, मैं ही तुम्हे सबसे अच्छा हूँ |
कितना भी बड़ा हो जाऊं माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ ||

माँ धरती की हरियाली है, माँ केसर वाली कयारी है |
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है ||

हर घर माँ को पूजा जाये, ऐसा संकल्प उठाता हूँ |
मैं दुनियाँ की हर माँ के, चरणों में शीश झुकता हूँ ||