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माँ की परिभाषा

माँ धरती, माँ आकाश है,
माँ फैला हुआ प्रकाश है |
माँ श्रद्धा, माँ विश्वास है,
माँ एकमात्र ही आस है ||

माँ आँगन की तुलसी जैसी,
माँ बरगद जैसी छाया है |
माँ सहज बेदना कविता की,
माँ महाकाव्य की काया है ||

माँ ममता की एक मूर्ति है,
माँ संस्कारों की पूर्ति है |
माँ हर हाथों की शक्ति है,
माँ एक प्रेम की भक्ति है ||

माँ हरी दुब है धरती की,
माँ केसर वाली क्यारी है |
माँ की उपमा केवल माँ है,
माँ हर घर की फुलवारी है ||

माँ गंगा, यमुना, सरस्वती,
माँ लक्ष्मी, गौरी देवी है |
माँ ही धरती का स्वर्ग है,
माँ साक्षात ही ईश्वर है ||

माँ झरनों का मीठा स्वर है,
माँ सहस्त्र ढाल प्रखर है |
माँ पूरी की पूरी भाषा है,
बस यही माँ की परिभाषा है ||
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वक़्त लगता है

दिल-ऐ-इश्क़ इज़हार में, वक़्त लगता है |
नये परिंदों को उड़ने में, वक़्त लगता है ||

दिल के सारे अरमानों को, ख़त में लिखना चाहा है |
प्यार का पहला ख़त लिखने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

इश्क़-ऐ-इज़हार को, आँखों में छुपाकर रखा है |
आँखों से मोहब्बत पड़ने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

तन की बात नहीं है, उसके मन तक मुझको जाना है |
लम्बी दूरी तय करने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

ख़्वाबों में दीदार के तेरे, महल सज़ा इक रखा है |
पर ख़्वाब मुकक्मल होने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....

हया का पर्दा आ जाता है, हाल-ऐ-दिल सुनाने में |
हया की बदली के छटने में, वक़्त लगता है ||
नये परिंदों को उड़ने में.....


तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |

तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |
प्यार भरे दिल के पन्नों से कोई पैगाम लिख डालूं ||

प्यार से मुझको देखकर यूँ मुस्कुरा जाना,
निगाहें मिलने पर पलकें झुका जाना,
झुकी हुई नज़रों का सारा अंदाज लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (१)

धड़कते दिल को इक दिन तेरे खत का मिल जाना,
शायरों की महफ़िल में नये शायर का आ जाना,
दिल से आज की ग़ज़ल को तेरे नाम लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (२)

तमन्ना थी हर सुबाह में दीदार के तेरी,
तुझे पाने से पहले थी अधूरी हर तमन्ना मेरी,
हर तमन्ना में जीने की तू ही बजाह लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (३)

उठते है हाथ बहुत दुआओँ के लिए तेरी,
ऐ खुदा छोटी सी दुआ भी है इक मेरी,
दुआ में तुझको अपना सबसे ख़ास लिख डालूं |
तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं।| ......... (४)

तड़प कर बरसों जीने का कोई अहसास लिख डालूं |
प्यार भरे दिल के पन्नों से कोई पैगाम लिख डालूं ||

माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

चलते चलते मैं घुटनों से, पैरों पर आपने खड़ा हुआ |
आँचल में तेरी ममता के, जानें कब बच्चा बड़ा हुआ ||

कैसे भूलूँ उस भाषा को, जो होठों से सिखलायी थी |
मुझे सुलाने को रात भर, तुमने जो लोरी गाई थी ||

काला टीका और दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसा है |
मैं ही मैं हूँ हर जगह तुम्हे, जानें ये प्यार तुम्हारा कैसा है ||

सीधा साधा भोला भाला, मैं ही तुम्हे सबसे अच्छा हूँ |
कितना भी बड़ा हो जाऊं माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ ||

माँ हरियाली है धरती की, माँ केसर वाली कयारी है |
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है ||

हर घर माँ को पूजा जाये, ऐसा संकल्प उठाता हूँ |
मैं दुनियाँ की हर माँ के, चरणों में शीश झुकता हूँ ||

एक लड़की बड़ा सताती है...

मेरे खवाबों में आकर के, वो मेरी नींद चुराती है |
रोज रात को इसी तराह, एक लड़की बड़ा सताती है ||

बिखरी बिखरी जुल्फें उसकी शायद वो घटा बुलाती है,
उसके पलकों के काजल से इक बारिश सी हो जाती है |
वो दूर खड़ी हो खिड़की पर मुझे देख देख मुस्काती है,
रोज रात को इसी तराह, एक लड़की बड़ा सताती है ||

मोती जैसी आंखें उसकी भोली भाली सी सूरत है,
रात की चांदनी में मुझको वो जब देख देख शर्माती है |
उसकी ये हालत देख देख मेरी धड़कन बढ़ सी जाती है,
रोज रात को इसी तराह, एक लड़की बड़ा सताती है ||

उसकी पायल की छम छम से एक मदहोशी छा जाती है,
ज्यों ही मैं आंखें बंद करू वो मेरे सामने आ जाती है |
उसके आने की आहट से मेरी आंखें खुल सी जाती है,
रोज रात को इसी तराह, एक लड़की बड़ा सताती है ||

ज्यों ही आँख खुले मेरी वो ख़्वाब सी बन जाती है |
सच बतलाऊं तो यारो, एक लड़की मुझे सताती है ||

चलो हम दोनों मिलकर के किनारा जोड़ देते हैं |

आशाओं की कश्ती का सहारा छोड़ देते हैं, चलो हम दोनों मिलकर के किनारा जोड़ देते हैं |
तुम्हारी आँखों का मंज़र, अभी वैसा का वैसा है, अब हम भी निगाहों को तड़पता छोड़ देते हैं |
हमीं ने आँखों से अपनी, समंदर तक निचोड़े है, आजकल हम ही दरिया को भी प्यासा छोड़ देते है |
हमारा क़त्ल होता है, हमेशा लैला की चाहत में, या ये कह लो की कातिल को हम ज़िंदा छोड़ देते हैं |
लिखी है शायरी हमने, बने गज़ल के शाहजादे है, तआरुफ़ तेरा सुन कर के, हम मिसरा जोड़ देते हैं | 
चलो हम दोनों मिलकर के किनारा जोड़ देते हैं |