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Showing posts from August, 2016

काश फिर से हम बच्चे बन जाते

मम्मी पापा से पैसे ले जाते,
दुकान से लेकर टॉफी खाते;
पड़ोस वाली आंटी को खूब सताते,
काश फिर से हम बच्चे बन जाते।

वो वारिस के पानी में नाव चलाते,
कभी पेड़ो पर चढ़ते तो कभी साइकिल चलाते;
कभी पतंग उड़ाते तो कभी गिल्ली उड़ाते,
काश फिर से हम बच्चे बन जाते।

होम वर्क न करने का बहाना बनाते,
लंच ना खा कर समोसे खाते;
क्लास में टीचर को खूब सताते,
काश फिर से हम बच्चे बन जाते।

पोगो पर डोनाल्ड डक खूब चलाते,
टॉम एंड जैरी को खूब लड़ाते;
शक्तिमान के बिना रह नहीं पाते,
काश फिर से हम बच्चे बन जाते।

पार्क में फूलों से तितलियाँ उड़ाते,
शाम को भागकर जुगुनू जुटाते;
बिना बात के मुँह फुलाते,
काश फिर से हम बच्चे बन जाते।