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Showing posts from May, 2018

माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ

चलते चलते मैं घुटनों से, पैरों पर आपने खड़ा हुआ |
आँचल में तेरी ममता के, जानें कब बच्चा बड़ा हुआ ||

कैसे भूलूँ उस भाषा को, जो होठों से सिखलायी थी |
मुझे सुलाने को रात भर, तुमने जो लोरी गाई थी ||

काला टीका और दूध मलाई, आज भी सब कुछ वैसा है |
मैं ही मैं हूँ हर जगह तुम्हे, जानें ये प्यार तुम्हारा कैसा है ||

सीधा साधा भोला भाला, मैं ही तुम्हे सबसे अच्छा हूँ |
कितना भी बड़ा हो जाऊं माँ, मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ ||

माँ हरियाली है धरती की, माँ केसर वाली कयारी है |
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है ||

हर घर माँ को पूजा जाये, ऐसा संकल्प उठाता हूँ |
मैं दुनियाँ की हर माँ के, चरणों में शीश झुकता हूँ ||